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सोमवार, 31 दिसंबर 2012

कुछ पक्तियाँ देश की दशा पर

भारत मे भुखमरी है मरते किसान है
पुलिस के मजबूत डंडे है काला धन कमाने
के हथकंडे है धर्म बंधक है
सेकुलरी तहखाने मेँ संस्कृति के सुहाग
चिन्ह तोड़े जा रहे है
पश्चिमि जनाना खाने मे गुरु अब
घंटाल हो गये कांनवेटी दड़वे
मालामाल हो गये नारीयो के चीर
अब बिकने लगे है मेरी आजादी की आड़
मेँ लज्जा त्याग मर्यादा झोँक
दी आधुनिक भाड़ मे अपनी भाषा से मुँह
मेँ छाले हो गये माखन प्रसाद
दिनकरो के काव्य मे लाले हो गये
श्रंगार की दुकानो बूढी भी बालायेँ
हो गई आज बहुँ भी सास से
सयानी हो गई दहेज न लाई
जला दी गई जो पैदा होते कोख मे
मारी गई वो बेगानी हो गई
सन्नि लियोन टी आर
पी की कहानी हो गई शराब स्टेटस
सिँबल बन गई दूध देने वाली गाय
दुर्बल बन गई देश मे आंतकवाद
अलगावबाद और दंगे है क्योकी कुछ
वोट के भिखमंगे हमाम(संसद) मे नंगे है
वो कहते है मैँ झूठ लिखता हुँ
तो तुमहारा सच मुझसे मुंह
क्यो छापाता है

1 टिप्पणी:

  1. beshak ham pareshaan hain,
    par usase jyada beiman hain,
    hai himmat ,hai lagan
    to kood pado maidaan me
    chidiya lade jab baaj se
    to vo bhe insaan aur ham bhee insaan hain,

    उत्तर देंहटाएं

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