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शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

हिँदू धर्म मे कोई दलित नही

दलित या शूद्र अपना रोना रोते है
अपने को दीन हीन बताने बाला ये
तबका कभी अपना इतिहास उठा कर
नही देखता सतयुग द्वापुर एंव
त्रेतायुग कालो मे राम या कृष्ण के युग
मे दलितो के अत्याचार का कोई
वर्णन नही मिलता और तो और हम
अगर 5000 ईसा पूर्व जाये
तो इतिहास मे दलित अत्याचार
का वर्णन नही है क्योकी तब दलित
भी सम्माननिय जीवन
जीता था लेकिन नये धर्मो के उदय एंव
आक्रमण कारी यो द्वार भारत पर
कब्जा जमाने के बाद दलित अत्याचार
शुरू हुय

2 टिप्‍पणियां:

  1. आप स्वयं इतिहास पढ़कर देखें। राम और कृष्ण के युग में दलितों(शूद्रो्) को कोई भी मानवीय अधिकार प्राप्त नहीं थे। दलितों को शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करने का अधिकार नहीं था। स्वयं राम ने शंबूक नाम दलित ऋषि का केवल इसलिए कत्ल कर दिया था कि शुद्र होते हुए वह तपस्या क्यों करता है। महाभारत काल में एकलव्य के साथ की गई क्रूरता से पूरी दुनिया वाकिफ है। कर्ण को भी जीवन भर सूत पुत्र होने के कारण जीवन भर अवसरों से वंचित रहना पड़ता है राम और कृष्ण के युग में शुद्रों के साथ किए गए घटियापन के ये एक दो उदाहरण नहीं। शुद्रों से हुई क्रूरता पर कई महाकाव्य लिखे जा सकते हैं।

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  2. शम्बूक नाम का कोई भी दलित पुरानी किसी भी रामायण में नही था।
    वाल्मीकि के द्वारा लिखी रामायण सिर्फ 6 अध्याय तक थी।
    सातवां अध्याय कुछ हिन्दू धर्म के खिलाफ गन्दी सोच रखने वालो के द्वारा जोड़ा गया
    इसका प्रमाड है की दूसरी भासाओ में पुराणी लिखी रामायण सिर्फ 6 अध्याय तक ही है।
    सारा विवादस्मक कचरा 7 वे अध्याय में है । जो झूठा है।

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