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बुधवार, 14 दिसंबर 2011

धर्मातरण का विषैला माहौल और अंखड भारत की कल्पना

भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र कहने वाली सेकुलरी बिरादरी धर्मान्तरण जैसी गंदी और मलिन गंदगी को साफ करने की वकालत कभी नही करती क्योकी ज्यादा तर धर्मातरण हिँदु का ही होता है कभी मुस्लिम या ईसाई को हिँदुतत्व का दामन थामे नही देखा ये बात सेकुलरवादी जानते है और दुख इस बात का है अपने को सेकुलर बताने वाले हिँदु ही है और मुस्लिम और ईसाई कट्टर धार्मिक होने पर भी अपने को राष्ट्रभक्त और मानवता वादी सिद्ध करते है और सम्मानजनक स्थान पाते है और अगर जागरूक हिँदू इन छदमवेशीयो पर उंगली उठाता है तो उसे सांप्रदायिक घोषित करने का प्रयोग शुरू हो जाता है और उन्हे साप्रदायिक कहने वाला अधिकांश हिँदू ही होता है जो अपने को हिँदू नही बल्की हिँदू से भी श्रेष्ठ जाति(सेकुलर) बताता है और वह राष्ट्रभक्त बन जाता है और जागरूक हिँदू राजनैतिक षंडयत्र का शिकार हो जाता है ओर उसकी आवाज काले करागार मे गुम हो जाती है धर्मातंरण का विष फैलाने वाले पहले प्रलोभन की रेवड़ी बाटते है फिर धर्मातारण का विष एक ना एक दिन समुचे हिँदुतत्व का नाश कर देगा और जो धर्मातरण करने वालो के साथ दे रहे है एक दिन स्वम इस विष के प्रभाव से बच नही पायेगे ...संविधान का मखौल उड़ाते मुल्ला और ईसाई निर्भिकता से धर्मातरण किये जा रहे है और सरकार या कोई हिँदु संगठन चुप बैठा देख रहा है संसद मे कभी धर्मातरण पर कोई ठोस कानून या बहस क्यो नही हुई ये शर्मनाक है देश मे बहुसंख्यक हिँदुओ की भावनाऐ संसद के पटल पर नही रखी जाती क्योकी ये हिँदुओ को भारतिय कम हिँसाकरने वाली जाति मानते है और इनका उद्देश हिँदुतत्व का मटिया मेट कर भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाना दिखता है और ये सच है क्योकी इन्हे हिँदु संस्कृति की हर बात देश विरोधी लगती है और अल्पसख्यको की सुविधा हेतु कानून बनाना देशहित कार्य लगता है ये दोमुंही नागनाथो को मार डालना ही उचित है क्योकी अंखड भारत हिँदु राष्ट्र का निमार्ण तब ही संभव है जब हर हिँदु राष्ट्रवादी हो और हर राष्ट्रवादी हिँदू ....जय राष्ट्रवाद

1 टिप्पणी:

  1. इन हिन्दुओं को तो समाप्त हो ही जाना चाहिए............
    यहाँ सिर्फ़ सेकुलर वो भी कथित वाले ही रहेंगे।

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